कवितासाहित्य

पावन हो सद कर्म हमारे, मन के भाव सजल करदो

__कैलाश चंद साहू

पावन हो सद कर्म हमारे, मन के भाव सजल करदो
वीणा के तारो से मां शारदे, मेरा गीत अमर कर दो।।

चरणों में समर्पित मन मेरा, ओझ भाव मन में भर दो
वंदन अभिनंदन माता, शीश पगा मन निर्मल कर दो।।

इस जहां आया लेकर, विश्वास मन विमल मति दो
भाव विहल मन मेरा, मन नख शिख से तुम गति दो।।

गाता रहूं तराना मधुर, वाणी में मधुर झनकार दो
मन नहीं रहे कोई दुराचार, जीवंत सदा फनकार दो।।

तेरी गोदी में जन्मा, पैरो से मन विकार निकाल दो
मन भावन हो कर्म सदा, मन से सभी तम मिटा दो।।

मेरे मन मंदिर को तुम, वंदनीय अभिनंदनीय कर दो
करू सदा तेरा वंदन अभिनंदन माता वर अर्पित दो।।

मेरा मन बरसाना करे मात, तन को वृंदावन कर दो
गोकुल में घनश्याम , देई को बाबा का धाम कर दो।।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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