कवितासाहित्य

पाश्चात्य संस्कृति और बदलता परिधान

डॉ साधना तोमर

पाश्चात्य संस्कृति को अपना
बदल दिये परिधान,
निज संस्कृति को भूल गये
भूले वह सम्मान।

फैशन के लिए मची है आज
कैसी अन्धी होड़?
छोड़े जीवन मूल्य अपने अब
कैसा है यह मोड?

लज्जा-आभूषण को छोड़ दिया
छोड़ी सब मर्यादा,
घूम रही अब भारत की नारी
तन दिखाती क्यों आधा।

फटी जींस आज बनी हुई है
फैशन का पर्याय,
वह भी आधी हो गयी है
कौन इन्हें समझाय।

कहाँ खो गयी  संस्कृति  हमारी
       कहाँ पहुँची है नारी। 
 सीमाएं  सभी  पार   हुई  अब
     बदली क्यों मति हमारी।

डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)
उत्तर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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