साहित्य

पुस्तक समीक्षा : भाव और विचारों की महक से भरपूर है-मन के फूल

समीक्षक : डॉ.अनिल शर्मा अनिल
लेखिका : एकता शर्मा

मेरी पहचान तो मेरे शब्दों से है,
और वो शब्द बने मेरे जज्बातों से हैं
बिना शब्दों के मेरी पहचान कुछ भी नहीं है
मैं जो भी हूं अपने अल्फाजों से हूं।
यह पंक्तियां हैं एकता शर्मा के काव्य संकलन मन के फूल से। जिसमें संकलित हैं उनकी 54 कविताएं।
जीवन के विभिन्न रंगों को कविता में संजोते हुए
एकता शर्मा ने अपनी बात में उम्मीद जताई है कि इस संकलन से मेरे हौंसलों को नयी उड़ान मिल पाएगी। उनकी यह उम्मीद एक प्रेरक का काम करती है।इसी संकलन में वह कहती हैं-
प्यार के गीत गाते रहो,
मुश्किलों में भी मुस्कुराते रहो,
कभी हारना मत जिंदगी की जंग,
बस उम्मीद के दिए जलाते रहो।
एकता की कविताओं में भाव और विचारों पक्ष सबल नजर आता है। संकलन की रचनाएं अपने शीर्षक से ही आकर्षित करती है। इनमें बसंत, जिंदगी,चांद, झरना, रेगिस्तान,राह तके ये नैन, प्रार्थना,लड़की पूछ रही, आहिस्ता -आहिस्ता,मेरा देश, पापा को खत,थोड़ी सी राहत,दोस्ती का रिश्ता,सुकून के पल, विश्वास, हिन्दुस्तान, दहलीज,वजह,मेरा श्रंगार, हिन्दी,सपना,मेरा सब कुछ तू, नन्हें मासूम,
तलब, उम्मीद, तमन्ना, गुरु वंदना,आत्म निर्भरता,जीत,सर्दी,शिव बारात, मजदूर, बेटियों को इंसाफ,नशे की लत,कागज की किश्ती, हमारा साया,नारी की पहचान,एक स्वप्न,पैगाम, क्योंकि मैं एक नारी हूं, भाई बहन,उपवन, बिटिया,बचपन, मां,कलम, बाबुल,गृहलक्ष्मी, यादें,पर्यावरण, हिम्मत और हौंसला,शायरी शामिल हैं।
इन कविताओं में आम बोलचाल की भाषा का उपयोग किया गया है।सहजता और सरलता इनकी विशेषता है। हिंदी के अलावा उर्दू सहित अन्य भाषाओं के आम जनजीवन में शामिल शब्दों का सहज प्रयोग करते हुए एकता ने अपने मन को अभिव्यक्ति दी है।
कुछ उदाहरण दृष्टव्य है-

  • कभी मंजिलों के करीब ले आती है ज़िन्दगी
    मंजिलों के करीब आते ही,
    मुश्किलें बढ़ा देती है ज़िन्दगी। (जिंदगी)
  • सादगी मुझे बहुत भाती है
    और सादगी में ही अक्सर,
    मुझे नजर लग जाती है। (सादगी)
  • लड़की पूछ रही है कि
    क्या लड़की होना पाप है
    क्या रुप धर जन्म लिया
    क्या ये अभिशाप है। (लड़की पूछ रही है)
    -क्योंकि उस जहां तक कोई
    डाकिया जा ही नहीं पाएगा
    मेरे पापा को उनकी लाडो का लिखा
    खत मिल ही नहीं पाएगा।(पापा को खत)
    जैसी पंक्तियां पाठक के मन को सीधे ही छू लेती हैं।
    जीवन के विभिन्न उतार चढ़ाव,भाव, मनोदशाओं और संघर्षों को बयान करती एकता शर्मा की कविताएं पाठक से सीधे वार्ता करती है। शिल्प पर ध्यान देकर इनको और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।संकलन की रचनाओं की दृष्टि से इसके रचनाकार में बहुत संभावनाएं हैं।
    मन के फूल में समायी भावनाओं और विचारों की महक साहित्य जगत को महकाते हुए भविष्य में और भी कविता कृतियों रुपी फूलों
    से साहित्य उपवन को एकता शर्मा समृद्ध करती रहे,ऐसी ही शुभकामनाएं।
    समीक्षित कृति – मन के फूल
    रचनाकार – एकता शर्मा
    प्रकाशक- सन्मति पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स
    हापुड़।
    पृष्ठ-80
    मूल्य- ₹110
    समीक्षक- डॉ अनिल शर्मा अनिल
    धामपुर उत्तर प्रदेश
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