कवितासाहित्य

प्यारी माँ

__सुषमा दीक्षित शुक्ला

चंदन जैसी मां तेरी ममता ,
तेरी मिसाल कहां दूं मां ,,।
जनम मिले गर फिर धरती पर,
तेरा ही लाल बनूंगा मां,,,।

तूने कितनी रातें वारी ,
जाग जाग कर मुझे सुलाया ।
अपने नैनों की ज्योति से,
तूने मुझको जग दिखलाया ।

कैसे चुकाऊँ कर्ज़ दूध का ,
कितना मलाल करूंगा मां ,,
तेरी मिसाल कहाँ दूं मां ,,,
जनम मिले गर,,,,,।

चल कर खुद तपती राहों में,
तूने मुझको गोद उठाया ।
नज़र लगे ना कभी किसी की
काला टीका सदा लगाया ।

मेर जीवन का तू हिसाब थी ,
किससे सवाल करूंगा मां ।
तेरी मिसाल कहाँ दूं मां ,,,।
जनम मिले गर,,,,

जीवन पथ से काँटे चुनकर,
तूने सुंदर फूल सजाया ।
मां ना कभी कुमाता होती ,
औलादों ने भले रुलाया ।

धरती नदिया पर्वत अम्बर ,
तेरी मिसाल कहाँ दूं मां ।
जनम मिले गर,,,

तेरे पावन अमर प्यार को ,
मैं नादां था समझ न पाया ।
ईश्वर भी ना तुझसे बड़ा है,
अब यह मेरी समझ में आया।

आंचल में फिर मुझे छुपा ले ,
तेरा ख्याल रखूंगा मां,,,।
तेरी मिसाल कहां दूं मां ।
जनम मिले गर ,,,,।

गीतकार
सुषमा दीक्षित शुक्ला लखनऊ
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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