कवितासाहित्य

प्यार भरा बादल

__कैलाश चंद साहू

जब बरसता है किसी पर प्यार का संदल कभी
फूल बनकर लुभाता है प्यार भरा बादल कभी।।

पुष्प खिलता है जमी पर छा जाती हैं खुशबू
बहके सावन भाता है गौरी का काजल कभी।।

जब कभी जुदाई मिलती प्यार मुहब्बत में तब
जब तरसता है प्यार भरा अरमान बादल कभी।।

सावन की घटा करती हैं जब अठखेलियां तो
भीग जाता है तन बदन से खुशबू संदल कभी।।

करती हैं बैचेन तुम्हारी मधहोशिया घायल मुझे
कर देता है इश्क मुझे तुम्हारा कायल कभी।।

काश कर जाती है उसकी खुशबू घायल हमे यूं
हो जाता है दिल उसकी याद में पागल कभी।।

जिस प्यार की खातिर किया हमने जतन कभी
अरमा तोड़कर कनक मत करना घायल कभी।।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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