लघु कथासाहित्य

बँटवारा

__स्वरचित।बृषभानुजा


एक किसान परिवार था खेती बारी अच्छी थी किसान के चार बेटा एक बेटी थी।तीन बेटे पढ़ने में अच्छे थे डाक्टर ,ईन्जीयर बने और छोटा बेटा खेती,बारी,गाय भैंस देखता था उसका पढ़ने मे मन हीं नहीं लगता था लडकी छोटी थी सुखी परिवार था।
. तीनों बेटो की शादी पढी़ लिखी लड़कियों से हो गई छोटा कमाता नहीं था उसकी शादी नहीं हुई थी लड़की की भी शादी हो गई वह अपने ससुराल में थी किसान छोटे बेटे के लिए बहुत दुःखी रहता था बडे़ उसको नालायक मानते थे।
जो आया है उसको जाना ही है किसान का भी देहांंन्त हो गया।बडे बेटे बाहर सें आगयें सब क्रिया कर्म निपट गया।उस के बाद भाइयों मे बँटवारा होना था छोटे को यह प्रस्ताव पसन्द नहीं आया उसने कहाँ आपस मे बाँट कर मेरा हिस्सा छोड़ दिजिएगा और तालाब पर जाकर बैठ गया।
अच्छा खेत बाँग तीनो भाई आपस में बाँट लिए छोटे को मकान थोड़ी सी जमीन गाय भैंस हिस्से मे मिला छोटे को बुला कर बताया गया।यह घर सामने की जमीन और गाय, भैंस तुम्हारे हिस्से का है।छोटे ने पुछा और छोटकी को।भाइयों ने कहाँ ओ तो पराई है छोटे ने कहां और माई का हिस्सा भाई बोले थोडे़ थोडे़ दीन हम तीनो के यहाँ रहेगीं छोटे ने कहाँ बँटवारा मुझे मंजूर नहीं है।
यह सुनते सब सन्न हो गये बडी़ बहुँए कहने लगी बहुत सीधा मानते थे छोटे को यह तो बडा़ काईया निकला।पंच बुलाने को कह रहा है खैर पंच आये छोटू को बुलाया गया।
पंच पुछे छोटू तुम्हें क्या कहना है।छोटू बोले पंच लोग मेरी बात सुने मेरे हिस्से में जो मिला हैं वह छोटकी को दिया जाँय माई के पेट से वह भी है पिता जी के जायदाद में उसका भी हिस्सा है और माई को हमे दिया जाँय। जीसको मिलना होगा वह आकर माई से मिल लेगा माई अपने घर में रहेगीं जो भी कमा कर लाऊँगा माई
उसी मे हमरा भी भरण पोषन कर देगीं क्योंकि माई अन्नपूर्णा है।
इतना सुनते पंच उठ कर खडे़ हो गये बोले धन्य हो छोटू तुम पढे़ कम हो लेकिन सदाचार में आगें हो ।
सदाचार तुम से सब को सिखना चाहिए।तीनो भाई भी उसे गले लगा लिए।


स्वरचित।बृषभानुजा

गोरखपुर, यू ,पी

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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