कवितासाहित्य

बंद होठ

__सीताराम पवार


जब तक जुड़े थे शाख पर जिंदगी उनकी हसीन थी

जिंदगी में जितने भी कोहराम है वह सब झूठे बयान के है|

सच पूछिए तो जिंदगी के ये रिश्ते केवल जुबान के है|

कड़वी सब रिश्ते तोड़ देती हैं और मीठी रिश्ते जोड़ देती है

हमको यहां मिले जो रिश्ते वो सब अपने अपने अरमान के है |

जिसने ये बंद होठ कर लिए अपने उससे उम्मीद क्या करना

इस जहां में उसके यह सारे तेवर खुद की ही शान के है|

जब तक थे ऊपर सारी कायनात उनसे ही रोशन थी

जमीन पर गिरते यहा ये सितारे लगता है आसमान के है |

जब तक जुड़े थे शाख पर जिंदगी उनकी हसीन थी

शाख से गिरते पत्ते फिजा मे आने वाले तूफान के है |

आए थे हम जमीन पर आकर हमको है वापस जाना

यहां पर हमारा कुछ नहीं जो है सब आने वाले मेहमान के है|

जी रहे थे मेरा मेरा कहकर हमको इसका ज्ञान नहीं था

हमको भी नहीं थी खबर हम सब केवल भगवान के है |

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
मध्य प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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