साहित्य

बच्चियाँ रहें सुरक्षित उनका करें सम्मान

डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव


कलश स्थापित करके,करते शक्ति का सम्मान।
नवरात्र में नौ दिन करते,मैया दुर्गा का गुणगान।।

नारी बहन बेटी माँ,स्त्री बहू भयाहू हैं यह मान।
कब सचमें दिल से इनका,होगा इज्जत सम्मान।।

नवरात्र में घर में कन्या पूजें,करें पूण्य और दान।
शेष दिनों कन्या भ्रूण,गर्भ में मारें ये कैसे इंसान।।

ऐसा कर्म किया जब तब,शर्म लाज का न भान।
पैदा हुई अबोध तो,वो फेंकें उसे झाड़ी/कूड़ेदान।।

नवरात्र में नौ दिन,माँ अम्बे का ये नौ रूप महान।
दिल में बसाये पूजते,भक्तगण करें माँ का ध्यान।।

सबको जन्म देने वाली,ये नारी है कितनी महान।
क्यों यह संकल्प नहीं लेते हैं,करेंगें नारी सम्मान।।

कन्याएं नहीं बचेंगी तो, वंश नहीं होगा गतिमान।
सृष्टि सृजन के कार्य में,क्यों उत्पन्न करें व्यवधान।।

नारी है तो सारी है,सुंदर ये दुनिया सकल जहान।
पीहर ससुराल दोनों में,देती हैं बेटियाँ नई उड़ान।।

आओ इस नवरात्र में,माँ के व्रत संग करें ये काम।
हर माँ बहन बेटी में देखेंगें,तेरा रूप माँ दुर्गा मान।।

कष्ट नहीं देंगें अब हम,करेंगें हर नारी का सम्मान।
माँ दुर्गा भी खुश होंगीं,कर देंगीं तेरा भी कल्यान।।

अष्टम महागौरी मइया,पूर्णकरें मनोकामना जान।
हे!शक्ति स्वरूपा अम्बे मैया,सबको दें ये वरदान।।

जय-जय हो मैया, दिलों में भर दो नारी सम्मान।
नारी का हो जग में ऊँचा,सबसे बड़ा सदा स्थान।।

रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
संपर्क : 9415350596

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