साहित्य

बच्चों की खुशियाँ

अलका जैन
बच्चे खुश हो घर में अपने।
अभिभावक लगते प्रभु जपने।।
घर अलका जब खुशियाँ महके।
पंख लगा पंछी सब चहके।।

कुछ उनकी कुछ अपनी कहना।
खुशी-खुशी सुख पहनो गहना।।
मिले बात में छोटी खुशियाँ।
पाया पलटे घर की बगियाँ।।

सोना चाँदी नहीं चाहिए।
झूम उठे मन संग गाइए।।
खेल-खेल में उन्हें बताए।
जीवन के कुछ राज सिखा।।

एक नियम जीवन में पालो।
काम बोझ सारा मत डालो।।
बाग चलो मस्ती में झूमे।
संग उन्हीं के खुशियाँ चूम।।

मिले खुशी अलका की चाहत।
लायक बच्चे मिलती राहत।।
कल की नीव हमारे बच्चे।
दया धर्म रख बनना सच्चे।।
अलका जैन आनंदी मुंबई

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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