कवितासाहित्य

बारहमासी सोता !

राजीव कुमार झा

यह काफी
पुराना रास्ता
इसके बारे में
कोई गर कभी
कुछ भी बताता
उसे याद भी
ठीक से कुछ भी
नहीं आता
होश हमने
जब से संभाला
इसे घर के बगल से
गुजरते देखा –
यहां पर
इत्मीनान से
आदमी
इस पर रोज
आता – जाता
रहा !
धूप हवा पानी
पत्थर ,
वह सब इसको
भाता रहा !
यह मेहनतकश
लोगों का
बनाया रास्ता
यहां से आकर
गुमटी में बैठकर
हम रोज बातें करते
चाय पीते
बिस्कुट खाते
रविवार के दिन
दोपहर में दोस्त
मिलने आते
यहां उनको बिठाते
जिंदगी का रास्ता
रोज देखते
सबको बताते
हर मौसम का फूल
बेचने वाले
यहां आते
छोटे – बड़े
अनगिनत रास्तों पर
आदमी की
चलती रही जिंदगी !
किसी कवि ने
सचमुच ठीक ही
कहा है –
लीक पर ही
सपूत बनकर
आदमी
जिंदगी के रास्ते पर
कई युगों से
चलता रहा है!
इसके दोनों
किनारों पर
विस्तीर्ण आकाश
समुद्र की तरह
हंसता रहा है !
अकेला आदमी
यहां आकर
सबकुछ
समझता रहा है
जीवन में,
भटकाव से
बचता रहा है!
सचमुच !
जीवन एक धर्म है ,
कर्म का पंथ है
इसके निर्वहन के
रास्ते अलग – अलग हैं !
धर्म हमें
कर्म प्रवृत्त करता है
और मनुष्य
इसके अनुसार
मोक्ष प्राप्त करता है
यही जीवन का
अभिष्ट है !
जीवन के
कच्चे – पक्के रास्ते
ज्यादातर नदियों के
किनारे बने हैं
इनके किनारे गांव
खेत खलिहान और
शहर बसे हैं
आदमी का रास्ता
घर से शुरू होता
पगडंडी पर आकर
आदमी कुएं के पास
मंदिर में
अपने पांवों को
धोता,
शाम में बाजार से
घर आता
रात में सुख चैन
से सोता!
अंधेरे में रास्ता
सुनसान हो जाता
यहां आदमी
जब हिफाजत से
खुद को दूर पाता
तब अपने मन में
आत्म विश्वास की
भावना को जगाता
भगवान का नाम
लेकर
आगे बढ़ जाता
जिंदगी के रास्ते में
साहस ही संबल है
आपके पास
जाड़े में अगर
कोई गर्म कंबल है
गर्मी का मौसम
एक डंबल है!
पेड़ की छाया में
सब जाकर
बैठ जाते हैं
रास्ता बरसात में भी
ठहर जाता है
बारिश में इसको
देखना
सबको खूब भाता है!
कवियों के लिए
वसंत जिंदगी का
सात समन्दर है !
यहां रोज
सुंदर सुबह होती
सूरज की किरणों से
धरती के
हर हिस्से में झरते
असंख्य
चमकते मोती
यह जीवन
ज्ञान कर्म धर्म
वैराग्य साधना का
साधन है!
मानवता के
कल्याण की कामना
इसका अभिष्ट है!
जिंदगी में
अपना रास्ता
कहां कभी खत्म होता
जिम्मेदारियों को
भूलकर आदमी
जब घर में बीमार की
तरह
बिस्तर पर पड़ा होता
किसी रास्ते में ही
आदमी
खुशहाल होता
रोज सुबह पहाड़ के
नीचे बहता
पानी का
बारहमासी मीठा सोता !

इंदुपुर
पोस्ट – बड़हिया
जिला – लखीसराय
बिहार

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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