साहित्य

बेजुबान आए

सीताराम पवार
“अब तो हसीन हसरते हमसे पहले मर चुकी होगी उनकी”
*
क्या पता है इस फ़ानी दुनिया में मौत का पैगाम कब आए

अपनी इस गमजदा जिंदगी की आखिरी शाम कब आए।

उनका रास्ता देखते देखतेअब तो शब से सहर हो गई यारो

चलते चलते इस सफर मे थक गया हूं मै जाने कब मुकाम आए।

दिल अगर तोड़ना ही था उसको फिर ये दिल उसने लगाया ही क्यो

दिन के साथ यह दिल डूबने लगा है जाने मौत का फरमान कब आए।

चमन उजड़ने के बाद अब बाहर आई भी तो किस काम की

उजड़े हुए गुलशन मे फिर से खुशी का जाने अरमान कब आए।

अब तक तो ख्वाबों मे हमे हसीन चेहरा दिखाई देता था उनका

आए भी मुरझाया चेहरा लेकर इस चेहरे पर जाने मुस्कान कब आए।

किसी से बेपनाह प्यार किया था क्या ये कभी उसने सोचा होगा

देखना होगा उसके मुरझाए चेहरे पर वो गुमान कब आए।

अब तो हसीन हसरते हमसे पहले ही मर चुकी होगी उनकी

अब तो इंतहा हो गई प्यार की वह आए भी तो तब बेजुबान आए।

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
मध्य प्रदेश
9630603339

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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