कवितासाहित्य

बेेेटी

__मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश


गुल गुलशन गुलनार है बेटी
कुदरत का उपहार है बेटी
मादक अल्हड़ पुरवाई सी
शीतल पवन बयार है बेटी।।

मात तात के दुःख में शामिल
बेटों से बेटी है काबिल
खट्टी मुट्ठी सी रिश्तों की
भाव समर्पण प्यार है बेटी।।

बेटा बेटी में भाव ना करना।
कभी हृदय में घाव ना करना।
मात पिता का अंश है इसमें।
सम्मान की ये हकदार है बेटी।।

बिन बेटी घर सूना लगता।
कहीं ना घर में आभा लगता।
बेटी के बिन रौनक फीका।
ड्योढी की श्रृंगार है बेटी।।

बेटी हृदय हर्षाती है।
प्रेम सुधा रस बरसाती है।
महके बेटी से घर अंगना।
उत्कल गंगा धार है बेटी।

अन्नपूर्णा का रूप कहाती।
हंस के सारे गम पी जाती।
लाती संग तकदीर ये अपनी।
समझो मत की भार है बेटी।।

मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!