साहित्य

बैसाखी पर बरसी

डॉ पंकजवासिनी

जलियांवाला बाग हूं मैं !
प्रतिवर्ष रोता आज हूं मैं !!
कहने को था आज दिन मंगल बैसाखी !
मेरे लाल मरे थे ज्यों परकटे पाखी !!

आजहिं इतिहास मेंअंकित वह दिन काला !
मेरी गोद मरे सहस्र नर बाला !!
आजादी के वे मतवाले थे !
राष्ट्र पर मर मिटने वाले थे !!

नहीं पसंद थीं दमनकारी रीतियां !
अंग्रेजों की रालेक्ट की नीतियां !!
सत्यपाल सैफुद्दीन की गिरफ्तारियां !
ब्रिटिशों की आतंकी मक्कारियां!!

सो विरोध के हित जमा हुए थे !
हा! माटी की आन पर फना हुए थे!!
शहर में था भारी कर्फ्यू लगा !
तब भी पांच हजार जन हुए जमा !!

निरंकुश सशस्त्र ब्रिटिश सरकार थी !
अहिंसक विरोध की न दरकार थी !!
आ धमका इतिहास का क्रूरतम व्यक्ति डायर !
किया पल में सोलह सौ पचास राउंड फायर !!

कर दीं थीं निकलने की सारी राहें बंद !
तड़ातड गोलियों की बौछारें न हुईं मंद !!
चारों तरफ अफरा-तफरी और चीख-पुकार !
छातियां छलनी होते जन का हाहाकार !!

इक दूजे पर गिरते पड़ते भागते हुए लोग !
जान बचाने को कुएं में कूदते हुए लोग !!
गूंज उठा भू से नभ तक भीषण चीत्कार !
चहुंओर अनगिन लाशों की हुई भरमार !!

मृतकों से भरा कुआं, छलनी हुई दीवार !
बह रही थी सब तरफ लहू की ही धार !!
छाती से शिशु चिपकाए माताएं धायं बार-बार !
लोमहर्षक दृश्य यह देख मैं हुआ बेजार !!

न बिसरीं स्मृतियां उस भयंकर नरसंहार की !
न भूला काली करतूतें ब्रिटिश सरकार की !!
आज भी भीतर भीतर भरता मैं सिसकियां !
बंध जाती हैं रोते रोते मेरी तो हिचकियां !!

आओ पास मेरे सुनो मेरा नीरव क्रंदन !
उन शहीदों को सपूतों को मेरा कोटि नमन!!

डॉ पंकजवासिनी
पटना, बिहार

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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