कवितासाहित्य

भक्ति माधुरी


__कल्पना भदौरिया “स्वप्निल “

आकांक्षा से मन भरा , आशाएँ फिर साथ |
आनंदी की हो दया, ब्रह्माणी रख हाथ ||

जग मायावी बोलता, हम पालेंगे आज |
मैं अज्ञानी सोचता, ब्रह्माणी पर नाज ||

मन शंकाओं से भरा, अब संभालो यार |
ब्रह्माणी दर्शन मिले,सत संस्कारी सार ||

नादानी को मानकर, कल्याणी दे दान |
हम अज्ञानी माँगते, ब्रह्माणी कर दान ||

कल्याणी माँ शारदे , मायावी संसार |
अज्ञानी सत पथ चलें,संस्कारी व्यवहार ||

ब्रह्माणी माँ को नमन,कल्याणी हो आप |
रुद्राणी बनकर हरो, अज्ञानी का ताप ||

बाधाओं को पार कर,ले कल्याणी नाम |
संस्कारी बनना सदा, संसारी सब काम ||

नादानी को देख कर, नाकामी है हाथ |
कल्याणी नैना कहे,आशाएं सब नाथ ||

लख चौरासी तार दे, हे कल्याणी मात |
हम आभारी आपके, उम्मीदों की रात ||

जग कल्याणी अम्बिका,सब पाएंगे मुक्ति |
ज़ब संभाले मातु श्री, बन संयोगी युक्ति ||

मन आकांक्षा प्रेम की, कर संसारी कर्म |
तज अज्ञानी भाव को, हो रंगीला धर्म ||


कवयित्री
कल्पना भदौरिया “स्वप्निल “
लखनऊ
उत्तरप्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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