कवितासाहित्य

भारतीय संस्कृति मे अक्षय तृतीया का महत्त्व

बृजकिशोरी त्रिपाठी

वैसाख माह के शुक्ल पक्ष में
पड़ता तिथि पुनीत।
दान धर्म जितना करे उतने बढे़ सुकृत।
गंगा मे स्नान करी पूजे विष्णु रूप श्रीराम।
अक्षय तृतीया के दिन जन्म लिए प्रशुराम।
जमदग्नि रेनुका के पुत्र हुए ललाम।
अक्षय तृतीया को अभिजीत है मुहूर्त।
दान धर्म विवाह के लिए समय है उपर्युक्त।
खेती बारी का सब काम हो गया खतम।
घर मे अनाज रख खुशी मनाये हर दम।
नये अन्न से पकवान बना के भोग लगायै भगवन को।
नवान्न गुड घी से हवन करे तृतीया को।
सोना , पिला कपड़ा,दान दे ब्राह्मण को।
गाय बछडा सहित ब्राम्हण को दे दान।
दान पुण्य करने से मनुष्य का बढ़ता है सम्मान।
ब्राह्मण कुल दिपक हुए ऋषि
परशुराम।
क्षत्रिय कुल भूषण हुए जन जन के प्रिय श्री राम।
अक्षय तृतीया को शुरु करो सारे शुभ काम।
भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाओ।
दिपक जलाओ ब्राह्मण को भोजन कराओ।
विष्णु भगवान का पूजन करो पीला फूल तुलसी चढ़ओ।
मिठा पदार्थ का लगाओ।
बन्धु बान्धव सहित प्रिति से खाओ।
आखा तीज के दिन त्रेता युग
आया।
गणेश जी वेद व्यास जी ने महाभारत का रचना किया।
हर तरह से आज का दिन अद्भुत है।

बृजकिशोरी त्रिपाठी उर्फ
भानुजा गोरखपुर यू.पी

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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