साहित्य

भारत के पर्व

नीलम द्विवेदी

आई है पावन पर्वों की बेला ,
खुशियों की अनुपम सी बेला,
रिश्तों को ये करती है मजबूत,
धरती पर आता ईश्वर का दूत,
नवरात्रि का पावन शक्तिपर्व,
नवदुर्गा के स्वरूप दिखलाए,
माँ अम्बे का आशीष दिलाए,
दशहरा पर्व भी प्रतिवर्ष मनाएँ
सब रावण का पुतला जलाएँ,
पाप बुराई की हार बतलाएँ,
व अच्छाई की जीत दिखाएँ,
करवाचौथ का उपवास करें,
जीवनसाथी संग प्रीत बढ़ाएँ,
दीपावली का तो क्या कहना,
सबके मन में उल्लास जगाए,
हर घर चमके नवीन हो जाए,
हर घर आँगन पावन हो जाए,
नए वस्त्र धारण कर सब आएँ,
दीपों से सबके द्वार जगमगाएँ,
अमावस भी उजली हो जाए,
लक्ष्मी माँं का पूजन सब करें,
मित्रों को ढ़ेर बधाइयाँ दे आएँ,
गोवर्धन की महिमा सब गाएँ,
भाईदूज में भाई के टीका लगाएँ,
भाई बहन का सच्चा प्रेम बताएँ,
भारत के हर त्यौहार सिखाएँ,
हम प्रेम और सद्भावना फैलाएँ,
भारत में मिलकर हर पर्व मनाएँ।

नीलम द्विवेदी
रायपुर ,छत्तीसगढ़

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