कवितासाहित्य

भारत मेरा खो रहा

सांप्रदायिकता के दंगों में,
भारत मेरा खो रहा है…
वह भारत कहां है मेरा ?
जहां ईद की सेवइयां ,
दिवाली की मिठाईयां ,
मिट्टी से उड़ता गुलाल…
सामने से जनाजा निकले
तो दुआ करते थे ,
मियां जी की अर्थी को कंधा दिया करते थे,
इंसान थे पहले हम,
फिर हिंदू मुसलमान बने …
बच्चों के दिल में,
हर धर्म का अभिमान था,
सांप्रदायिकता के नाम पर,
नहीं दंगों का कोई काम था…
क्यों भाई भाई को लड़ा रहे हैं ?
कुछ नेता अपने वोट पका रहे हैं…
नहीं जागे तो,
मन में इतना जहर भर देंगे ,
आने वाली नस्लों को,
एक नया इतिहास ही पढ़ा देंगे…
भारत तो वह देश है,
जिसमें बसे हर धर्म का चेहरा,
जय हिंद जय भारत!!


-श्रुति

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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