साहित्य

भावभीनी श्रद्धांजलि

सुषमा श्रीवास्तव

हिन्दी साहित्य सुमन वाटिका में खिले हुए कतिपय पुष्पों ने अपने मनमोहक सुगंध से सारे वातावरण को सुरभित कर दिया किंतु एक पार्श्व ऐसा था जहाँ ऊँचे- नीचे टीलों के अलावा और कुछ भी दृष्टिगोचर नहीं होता,आवश्यकता थी एक ऐसे व्यक्तित्व की जो उस पार्श्व को समतल कर उसमें नवीन पुष्पों को आरोपित करे।शीघ्र ही एक ऐसे व्यक्तित्व का प्रादुर्भाव हुआ। वे थे हिन्दी प्रांगण के मंजे खिलाड़ी, मां सरस्वति के अमर पुत्र “आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी “
          जिस प्रकार सूर्य अपने स्वर्णिम आलोक से धरती के अंधकार को दूर कर देता है ठीक उसी प्रकार आप अपनी ज्ञान रूपी आभा से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर देते हैं। “आप उस भ्रमर के समान हैं जो जीवन रूपी मकरंद तो देता है किंतु डंक कभी नहीं मारता”
        आज इस पुण्यात्मा की पुण्यतिथि है इस अवसर पर मैं समस्त साहित्य जगत की ओर से उनको नमन,स्मरण एवं वंदन करते हुए कोटि-कोटि श्रद्धासुमन समर्पित करती हूँ।
साथ ही श्रद्धेय द्विवेदी जी के जीवन का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कर रही हूँ –:
  पूरा नाम – महावीर प्रसाद द्विवेदी
जन्म – 1864
जन्मभूमि -दौलतपुर गाँव,
 रायबरेली, उत्तर प्रदेश।
मृत्यु -21 दिसम्बर, 1938
मृत्युस्थान -रायबरेली
अभिभावक -रामसहाय द्विवेदी
कर्मभूमि -भारत।
कर्म-क्षेत्र – साहित्यकार, पत्रकार।
मुख्य रचनाएँ –
पद्य- देवी स्तुति-शतक, काव्य कुब्जावली व्रतम, काव्य मंजूषा, सुमन आदि।
गद्य- हिन्दी भाषा की उत्पत्ति, सम्पत्तिशास्त्र, साहित्यालाप, महिलामोद आदि।
भाषा -हिन्दी, संस्कृत, गुजराती,  मराठी और अंग्रेज़ी।
नागरिकता – भारतीय।
अन्य जानकारी – ‘सरस्वती’ सम्पादक के रूप में इन्होंने हिन्दी के उत्थान के लिए जो कुछ किया, उस पर कोई भी साहित्य जगत गर्व कर सकता है।
       आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी हिन्दी साहित्य की अद्वितीय विभूति थे, हैं और रहेंगे। उन्होंने हिन्दी भाषा और साहित्य की बहुमुखी सेवा की है। उनका साहित्य-सृजन विराट था। वे हिन्दी साहित्य के समर्थ साहित्यकार है। हिन्दी साहित्याकाश के देदीप्यमान नक्षत्र आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग – प्रवर्त्तक साहित्यकार, भाषा के पारिष्कारक, समालोचना के सूत्रधार एवं यशस्वी सम्पादक थे।
आधुनिक हिन्दी साहित्य को  समृध्द एवं श्रेष्ठ बनाने का श्रेय आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ही को है उन्होंने हिंदी भाषा का संस्कार किया तथा गद्य को सुसंस्कृत, परिमार्जित एवं प्रांजल बनाकर प्रस्तुत किया। अपनी विशिष्ट अभिव्यक्ति और प्रभावपूर्व प्रस्तुति के कारण आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी की गणना वर्तमान युग के अग्रिम पंक्ति के साहित्यकारों में की जाती है।  द्विवेदी जी हिन्दी गद्य के उन निर्माताओ में से है, जिनकी प्रेरणा और प्रयत्नों से हिन्दी भाषा को सम्बल एवं ख्याति प्राप्त हुई। आचार्य द्विवेदी जी को द्विवेदी युग का प्रवर्त्तक  कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है।
         लेखिका एवं प्रस्तुति-
                     सुषमा श्रीवास्तव

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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4 Comments

  1. हमारी रचना को स्थान देने के लिए आपक साभार हार्दिक धन्यवाद!

  2. सुषमा श्रीवास्तव मैम का लेख बहुत ही ज्ञानवर्धक है। श्रीमान महावीर प्रसाद द्विवेदी जी को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि

  3. मेरी रचना को पोर्टल पर स्थान देने के लिए भूरि-भूरि आभार!

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