साहित्य

मकर संक्रांति

नम्रता श्रीवास्तव

मकर संक्रांति लाई बहार।
छाया हर्ष उल्लास ऐसा।
खुशनुमा हुआ मौसम जैसा।
तिल लड्डू का मधुर त्यौहार।

सब जन नाचते और गाते।
आपस का फिर बैर भुलाया।
प्रेम पूर्वक गले लगाया।
एकता ये त्यौहार लाते।

दान दक्षिणा सबको करना।
माह भी आ गया अति पावन।
अंबर में पतंग मनभावन।
तभी सफल हो जीवन अपना।
भारतीय संस्कृति बताए।
पर्व अपने मिसाल बनाएं।।

नम्रता श्रीवास्तव
सादर समीक्षार्थ 🙏

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