कवितासाहित्य

मजदूर

__डॉ तृप्ति गोस्वामी “काव्यांशी”

भारत की धरणी का,रहा अनुरागी सदा,
माटी ही चंदन मेरा, पुत्र हूं बलवान मैं।

ठाठ बाट से रहता, ना किसी से डरता,
आसमान छत मेरी,रहता हूं शान मैं।

मां पर है मुझे गुरुर,मैं हूं उसका सुरुर,
खरा उतरूंगा सदा , लिए अरमान मैं।

रखता हूं सोच ऊंची, सपनों का बाजीगर,
बुलंदी के शहर में,मेरी पहचान मैं।

आलिशान भवनों का,ऊंची ऊंची मीनार का,
शान और शौकत का, हूं वास्तुविधान मैं‌।

पत्थर के बोझ तले,कंधे मजबूत करें,
पानी सा पसीना बहें, रहता सम्मान में।

सुविधा की तलाश में,भटकता नहीं कभी,
रखता न आस कहीं, है तृप्ति जहान में।

 डॉ तृप्ति गोस्वामी "काव्यांशी"
       जोधपुर राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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