साहित्य

मजदूर

चन्द्रकला भागीरथी

हाँ मैं मजदूर हूँ।
रुखी सूखी खाकर।
ठंडा पानी पीता हूँ।
कड़ी धूप में मेहनत कर।
तब परिवार चलाता हूँ।।
हाँ मैं मजदूर हूँ।।

ठंड देखू न पाला।
न बारिश देखूं।
न गर्मी का झाला।
सुबह को निकलता हूँ।
रोटी का बांधू थैला।
देर शाम को घर जाता हूँ।।
हाँ मैं मजदूर हूँ।।

बिल्डिंग को मै बनाता।
सडकों को मैं बनाता।
कुए खोदता नहरें खोदता।
लकड़ी का फर्नीचर बनाता।
लोहे का सामान बनाता।
सारे दिन मैं पसीना बहाता हूँ।।
हाँ मैं मजदूर हूँ।।

गाड़ी साफ़ करता।
होटलों कैंटीन में।
बर्तन साफ करता।
ठेले पर फल सब्जी बेचता।
गली गली शहर शहर फेरी लगाता।
रिक्शा चलाता गैस सैलेन्डर।
घर घर पहुंचाता हूँ।।
हाँ मैं मजदूर हूँ।।

चन्द्रकला भागीरथी

धामपुर जिला बिजनौर

उतर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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