साहित्य

मतङ्ग के कान्हा

डॉ आर के मतङ्ग

तेरे मोह में पड़कर कान्हा,
घूम रहा हूँ गली-गली।
तुझको फर्क कहाँ पड़ता रे,
तेरे आँसू हैं नकली।।

तेरी महिमा बड़ी निराली,
दिखती सावन सी हरियाली।
मुझपे फटा पजामा भी न,
तुझपे तो काली कमली।।

मुझको कहता चोर तू प्यारे,
तू माँखन चुराए गली-गली।
भोली-भाली राधा माँ को,
प्यार दिखाए तू नकली।।

उद्धव सबसे बड़े थे ज्ञानी,
गोपिन संग हवा निकली।
भूल गए सब ज्ञान की बातें,
लगे बोलने “लली-लली”

स्वरचित
डॉ आर के मतङ्ग
श्री अयोध्या धाम
9936871690

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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