साहित्य

मधुमास

शिखा अरोरा

मधुमास आया ये पावन ,
पीली सरसों मनभावन,

फूलों सा मुस्काता चल,
जीवन को महकाता चल |
कली खिली यहाँ बगिया में ,
भवरेऺ तू इठलाता चल |

खुशबू तू फैलाता चल ,
प्रीतम प्रेम बरसाता चल |
बारिश की फुहार में तू ,
दिलों को तू सहलाता चल |

कहती रही ये पगली पवन ,
मन में धधके अग्नि हर पल|
सावन आया झूम कर ये ,
याद आई तेरी पल पल |

सपना ये तू सजाता चल,
अंँखीयों में बसाता चल |
गा लो सजन गीत मिलन के ,
हृदय में तू समाता चल |

जीने की चाहतें हर पल,
राह हमें वो दिखाता चल |
कहता बगीचें का माली,
गमों को तू भूलाता चल ||

शिखा अरोरा (दिल्ली)

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