साहित्य

मधुर सपने

सीमा नरेंद्र शांडिल्य
यादों की दहलीज पर , नन्हीं सी चिड़िया फुदकने लगी
बंद आंखें यह क्या मंजर देखने लगी , लहलहा रहा था उम्मीदों का ” कल्पवृक्ष “
प्रकृति छेड़ रही थी तराना , खुशियां झरने से बहने लगी
सपनों की मुंडेर से बोला पागल कोई पंछी
सरगम सी बयार चहुँ ओर फिर गुनगुनाने लगी
ख्वाहिशें बन कर रंग बिरंगी तितलियां , बांध खुशी के घुंघरू घर आंगन में ठुमकने लगी
प्रेम की पराकाष्ठा , शांत बह रही थी भावनाओं की गहरी नदी
भास्कर भी स्वर्णिम आभा बिखेर फैला रहा था अनुपम छटा
कितना सुंदर था वह मंजर , छा रही थी मिलन की मधुरिम घटा
ख्वाहिशों के बादल जुगनू की तरह रहे थे टिमटिमा
मदहोश पलकों में समा गया था एक सुंदर जहां
तृप्त थी रूह रंजो गम से दूर , उफ्फ ये सपने होते कितने मधुर
ये सपने होते कितने मधुर |
” सीमा नरेंद्र शांडिल्य “

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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