कवितासाहित्य

महागौरी

मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’

दुर्गा महागौरी नमन,
वंदन सहज धरती गगन ।
माँ श्वेत शोभित वस्त्र हैं ,
कर धारती माँ शस्त्र हैं।।

गौरी महा अष्टम दिवस ,
माँ भावना में हैं सरस ।।
सौन्दर्य माँ सुखदायिनी ,
ऐश्वर्य अतुलित पावनी ।।

माँ रात रानी अति प्रियम,
उत्कर्ष माँ का आगमन।
लांगूर माँ को सोहते ,
नौ रात्रि यह मन मोहते ।।

माँ सिंह वाहन धारतीं,
दुष्टों सतत माँ तारतीं ।
सुनती जहाँ अरदास हैं ,
करती कृपा तब खास हैं ।।

अष्टम दिवस आराधना ,
माँ की करे मन साधना ।
हनुमत विराजें साथ में ,
शुचि ओम् सोहे हाथ में ।।

गौरी शिवा माँ पूजिता ,
माँ सत्य माँ अपराजिता।
वंदन नमन जग तारिणी ,
मधु हिय सदा शुभ कारिणी।।
मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’
प्रयागराज
09/04/2022

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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