कवितासाहित्य

माँ आती रहना

__गीता देवी

नवरात्रि हुई समाप्त अब,
मैया तुमसे है कुछ कहना।
अपनी बिटिया की सुध लेने,
रोज मेरी माँ आती रहना।।

तू ही मैया, तू ही पापा,
तू ही भैया, तू ही बहना।
हर रिश्ता तुझमें मैं देखूँ,
निभाने को माँ आती रहना।।

नहीं चाहिए धन और दौलत,
न चाहूँ अब कोई मैं गहना ।
आशीषों से झोली भरने,
सुन मेरी माँ आती रहना।।

सुबह शाम लूँ नाम तेरा,
विरह तेरा मुझको न सहना।
राह निहारूँगी प्रतिदिन मैं,
दर्शन देने माँ आती रहना।।

न आयी यदि मैया मेरी,
निशदिन रोएँगे ये नयना।
गोद बैठाकर आँसू मेरे,
पोंछने माँ आती रहना।।

गीता देवी
औरैया, (उत्तर प्रदेश)

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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