साहित्य

माँ कात्यायनी


महिषासुर मर्दनी माँ कात्यायनी कहलाती है।
नवरात्रि के षष्ठम दिन माता पूजी जाती है।।

अमोघ फल दायिनी माँ कात्यायनी कहाती है।
धर्म, अर्थ ,काम ,मोक्ष फल चारों दे जाती है।।

अद्भुत शक्ति भक्तों को,माँ कात्यायनी देती है।
दुश्मनों के संहार कर माँ ही वर देती है।।

रोग शोक सन्ताप को मन से सारे दूर भगाती है।
कन्याओं के विवाह को मां ही शीघ्र कराती है।।

घर घर ब्रज में देवी कात्यायनी पूजी जाती है।
गोप गोपियों को माता मनचाहा फल देती है।

चार भुजाओं से सुशोभित भास्कर सी चमकती है।
सिंह सवारी करके माता,जब जब दर्शन देती है।।

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी
जिला झालावाड़
राजस्थान

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