कवितासाहित्य

माँ का प्यार

__अनिता मंदिलवार सपना

धूप
कितनी तेज हो
कदमों को
रोक न सकी
जब सुनाई दी
अपने बच्चों के
कदमों की आहट
इतना समर्पण
इतनी संवेदनाएं
किसमें हो सकती है
सोचा है क्या आपने ?
वो तो एक ही
नाम है
वह है माँ
केवल माँ
और कोई नहीं
जो कदमों की आहट
पहचान लेती है
जब तुम कदम
जमीन पर रखते हो
उसे आभास
हो जाता है
सोचा है क्यूँ
हमने सोचा
और उत्तर यही
पाया कि
हम तो
माँ के ही अंश है
तो
कैसे न होगा आभास
जब हम बीमार
होते हैं तो
माँ दूर होकर भी
जान जाती है
कुछ तो हुआ है
उसकी अकुलाहट
उसकी बेचैनी
सब बता देती है
मेरे साथ
हर बार ऐसा ही हुआ
जब हमने
नहीं बताया
फिर भी
जान गई
मेरी आवाज सुनकर
मैं परेशान हूँ
यही तो हैं
असली स्नेह
और दुलार
सबसे बढ़कर
उसका ही
है प्यार
उसका ही है प्यार

अनिता मंदिलवार सपना
अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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