साहित्य

माँ के नौ स्वरूप

मानसी मित्तल


नौ देवी नौ नाम हैं, शक्ति का स्वरुप।
सिंह वाहनी हैं कहलाती,
सुंदर रूप अनूप।
हिमालय पर्वत की सुता, शैल पुत्री नाम।
वाहन नन्दी है इनका,
त्रिशूल हस्त में थाम।

तप की देवी वृहमचारणी, जप की माला हाथ
कमंडल दूजे हाथ में,
जग का करती कल्याण।

तीजी देवी चंद्रघंटा,
सिंह पर चढ़ी सवार।
अर्द्ध चन्द्र शुशोभित है,
असुरों का करे संहार।

चौथी देवी कुष्मांडा ,
करें सृष्टि संचार।
आयु, बल, यश मिले,
महिमा अपरम्पार।

पांचवा रूप स्कंदमाता,
ज्ञान मिले भरपूर।
छठी देवी कात्यानी देवी,
मंगल करती खूब।

सातवां रूप कालरात्रि,
विघ्नहर्ता कहलाती,
आठवां रूप सिद्धिदात्री,
नाम(सिद्धि) से ही जानी जाती।

नवां रूप #माँ दुर्गा का,
रूप सारे विधमान।
धनधान्य व शक्ति का,
जग करता है गुनगान।

जय माता दी🙏🚩
स्वरचित✍️
मानसी मित्तल
उत्तरप्रदेश

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!