कवितासाहित्य

मां धरती

__अलका गुप्ता ‘प्रियदर्शिनी’


बड़ा ही व्यापक शब्द है धरती
जुड़ा है इससे जीवन का सार
जल नदियां झरने प्राणी हरियाली
इस धरा पर मानव जीवन का आधार।

मां धरती जो हमको दे देती
कोई मोल ना मांगे हम सब से
प्राकृतिक संपदा जो हमको देती
क्या मान रहे उसका उपकार।

धैर्य सदा धरती सा रखना,
सिखलाती है सबको मां धरती।
सब कुछ सह कर उफ नहीं करती,
पर उपजाऊ से बंजर बनती।

प्रकृति और धरा का संगम,
एक दूजे को करे विहंगम।
सगुण अगुण निर्गुण सब साधे,
सहती है सब जग का आभार ।

ऊंची ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं,
पेड़ लता चहुं ओर दिखें।
लहराती हरियाली जब फसलें,
संपूर्ण जगत का पेट भरे।

अलका गुप्ता ‘प्रियदर्शिनी’
लखनऊ उत्तर प्रदेश।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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