साहित्य

माता की भेंट


श्रृद्धा भाव से पूजू मां तुझको,नित- नित शीश झुकाऊं,
अर्पण कर दू अपना सारा जीवन,मां की भेंट चढाऊं!
जब जब बोले जुबां मेरी,बस नाम तेरा दोहराऊं,
इतना दिया तूने मुझे मेरी मैया,क्या-कया मै बतलाऊं!
मान दिया सम्मान दिया, गुणो से भरी संतान मिली,
तुच्छ सी थी इस धरती पर,तुझसे ही मुझे पहचान मिली!
आशीष नित बनाए रखना मइया,विनती यही दोहराऊं!
घर आंगन की फुलवारी को मेरी,यूं ही महकाए रखना,
दुख की धूप हो या सुख की छांव,अपने चरणो मे जगह मेरी बनाए रखना!
तू हो साथ मे मेरी मइया तो मै क्यूं किसी मुश्किल से घबराऊं,
चौखट हो तेरे मन्दिर की,और मै अंतिम सांस ले जाऊं!
अर्पण कर दूं अपना सारा जीवन, मां की भेंट चढाऊं!

शवेता अरोडा
50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!