साहित्य

माता की वंदना से ही तन मन आलोकित हो जाती है

नवदुर्गा की पूजा सात्विक रूप से ही भाती है,
माता की वंदना से ही तन मन आलोकित हो जाती है।

अक्षत ,नवैध,पुष्प से ज्यादा माता को स्वच्छ हृदय ही भाती है।

गणेश,कार्तिक,लक्ष्मी और सरस्वती माँ के संग माता के मायके आती है,
इनके चरण कमल पड़ते ही धरती स्वर्ग बन जाती है।

आठवें दिन माता अपना प्रचंड रूप दिखाती है,
कर महिषासुर- मर्दनी पूरे विश्व को एक सबक सिखाती है।

सत्य के आगे असत्य कभी जीत सकता नहीं,
निर्बल पर ताकतवर हर वक्त विजय पा सकता नहीं।

आओ इस साल हम भी कुछ मन बनाये,
छल कपट को कर दूर हृदय को निर्मल बनाये।

चलो माता के चरणों मे स्वच्छ हृदय ही चढ़ाए,
बदले में माँ से अपने देश की भलाई ही चाहे।

स्वरचित-मौलिक रचना
मीना माईकेल सिंह✍️
कोलकाता

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