साहित्य

माता तेरा रौद्र रूप हमने पाया

जब जब धरती पर कालिमा है छाया,
विश्व जब दुःख से घबड़ाया।

आतंक भय जब अपना बाँह फैलाया,
तब तब हमने माँ तुझे गुहरा, माता तेरा रौद्र रूप हमने पाया।

अपने नौ रुपों में हे माँ नवदुर्गा तूने वह करामात दिखाया,
स्तब्ध रह गई पापियों की धरती,
जब तूने अपना विकराल रूप दिखाया।

स्त्री रूप में तेरा पर्दापण हुआ,
प्रेम,दया,करुणा आपमे है समाया।
रिक्त अंजली लेकर तेरे दर पर आती हूँ,
हर बेटियां सुरक्षित रहे बस यही निवेदन लाती हूँ।

हर पापियों का संहार करो,
हर बेटी की सहाय्य बनो।

हर बुरे विचार तेरे हवन कुंड में जल कर राख बने,
बुराइयां ,बहशीपन हो स्वाहा खाक बने।

जाने से पहले माता हर दिल मे प्यार उपजना,
हर इंसान का खुशियों का गुलशन बनाना।

हर गुलशन सदा खिला रहे,
तेरे दर पर माता हर मस्तक झुका रहे।

स्वरचित-मौलिक रचना
मीना माईकेल सिंह✍️
कोलकाता

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