कवितासाहित्य

माधुर्य

मधुमालती छंद

__मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’

माधुर्य वाणी सादगी ,
लाती बहुत है ताजगी।
मुस्कान अधरों सोहती ,
मधुरिम छटा मन मोहती।।

औषधि लगे माधुर्यता ,
वाणी बसाए शौर्यता ।
अन्तर समाहित भावना ,
मधुरिम ह्रदय की कामना।।

सत्यम् शिवम् शुचि साधना ,
माधुर्य ही आराधना ।
सौहार्द मानव कल्पना ,
सजती अधर बन अल्पना ।।

मन मधु मधुर माधुर्यता ,
शुचि शोभितम् शुभ धार्यता।
जैसे सुहावन शीलता ,
माधुर्य लाए धीरता ।।

बसती मधुर मन साधिका,
मुरली बसे ज्यूँ राधिका ।
प्रेमिल ह्रदय की भव्यता ,
कान्हा समाहित दिव्यता ।।

आओ धरें माधुर्यता ,
मधुमय बनाए सभ्यता।
मधु हिय बसी यह कामना,
माधुर्य मधुमय साधना ।।


मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’
प्रयागराज

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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