कवितासाहित्य

माला (अमृत ध्वनि छंद )

__कवयित्री
कल्पना भदौरिया “स्वप्निल “
लखनऊ
उत्तरप्रदेश


माला मन की फेर लो,पूरे होंगे काज |
दर्शन दे दो राम जी,ह्रदय पुकारे आज ||
ह्रदय पुकारे, आजा प्यारे, अँखियाँ तरसे |
नैन हमारे, प्रेम तुम्हारे, बादल बरसे ||
शरण तुम्हारे, अधर पुकारे,दें दो प्याला
ध्यान तुम्हारा, भजन हमारा,जपती माला ||

अविनाशी वो ब्रम्ह है, भजन करों निष्काम |
माला फेरुँ प्रेम की, आजा प्यारे राम ||
आजा प्यारे,जगती आशा,नैन निहारे |
मन से कहती, तुमको जपती,भाव हमारे ||
बसी उमंगे, उठी तरंगे,बैठी प्यासी |
हृदय समाया, सब बिसराया,तू अविनाशी, ||

झूठी माया देखकर, करना मत अनुराग |
माला फेरो श्याम की, जगता जाता भाग ||
जगता जाता, नेह प्रदाता, समझो प्यारे |
ध्यान लगाओ, हृदय बसाओ, वो है न्यारे ||
कहती दुनिया, सुनती सखियाँ, बात अनूठी |
संत बताये, सत्य दिखायें, माया झूठी ||

चलती चाकी देखकर, समझो मानव आज |
साबुत बचता कुछ नहीं, छूटे सारे काज ||
छूटे सारे, बन्धन प्यारे, सबको जाना |
खेल दिखाया, मेल सिखाया, जाना आना ||
मन की माला, पीकर प्याला, भज लो साकी |
नश्वर काया, झूठी माया,चाकी चलती ||


कवयित्री
कल्पना भदौरिया “स्वप्निल “
लखनऊ
उत्तरप्रदेश

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कुमार संदीप

अध्यापक सह लेखक । निवास स्थान- सिमरा(मुजफ्फरपुर) बिहार । विभिन्न साहित्यक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रचना प्रकाशन । कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित । वर्तमान में ग्रामीण परिवेश में अध्यापन कार्य सहित दि ग्राम टुडे मासिक व साप्ताहिक ई पत्रिका के अलंकरण का कार्य।

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