साहित्य

मुझे आदत नहीं हैं

शिखा अरोरा

बाद में आना ए हंसी मुझे फुर्सत नहीं हैं,
खुलकर मुस्कुराने की मुझे आदत नहीं हैं ।

आंखों में देखा तेरी नशा भरा हुआ सनम ,
पर न जाने क्यों पीने की मुझे आदत नहीं हैं।

जख्म बहुत खाए हैं हमने सीने पर अपने,
उन जख्मों को कुरेदने की मुझे आदत नहीं हैं।

पिंजरे में तो कैद किया नहीं किसी ने कभी ,
आकाश में उड़ने की मुझे आदत नहीं हैं।

मौत से रिश्ता गहरा हैं मेरा इतना यहां पर ,
कि जिंदगी जीने की मुझे आदत नहीं हैं।

ख्वाब जो भी देखे पिया साथ हमने,
उन्हें आजमाने की मुझे आदत नहीं हैं।

जिक्र करते हैं लोग उल्फत का मेरी ,
और फसानों की मुझे आदत नहीं हैं।

रातों पर तो मेरी तेरा पहरा हैं शिखा,
और दिन में सोने की मुझे आदत नहीं हैं।।

शिखा अरोरा (दिल्ली)

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!