साहित्य

मुहब्बत में न कभी यू मुर्झाया करो

कैलाश चंद साहू

अश्क आंखों से न यूं ही बहाया करो
उदासियो को भी कभी समझा करो।।

मतलब की ये दुनिया मतलब के यार
मुहब्बत में न कभी यू मुर्झाया करो।।

कभी आर कभी पार न जाया करो
यूं न तुम किसी का दिल तोड़ा करो।।

इश्क में न कभी तुम शर्मसार करो
गर कह न पाऊं तो समझा करो।।

कोई नहीं समझता दर्दे नश्तर को
राज दिल के न तुम बताया करो।।

कभी नफरतों को छोड़कर देखो
प्यार से सभी को समझाया करो।।

दिल में कभी नफरत मत पालना
चुपके चुपके दिल में समाया करो।।

अश्क आंखों से बहना ना तुम
तुम्हे ही प्यार करते समझा करो।।

मुस्कुराकर सदा तुम रहा करो
अपने बारे में भी कुछ सोचा करो।।

तुम हमारे और हम तुम्हारे रहेंगे
छोटी बातों पर न यूं रुसवा करो।।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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