कवितासाहित्य

मेरे पापा

__सपना कुमारी

              

पिता का साया,
उम्र भर नहीं रहती,
दुनिया का दस्तूर है,
दुनिया से हर शख्स को,
छोड़ कर जाना पड़ता है,
धरती पर माता पिता को,
भगवान के समान माना गया है,
आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा, सपनों की उड़ान भरना
आपने ही तो सिखाया था पापा,
उम्र के इस दहलीज पर,
आप की नसीहत याद आती है,
हम बच्चों की हर ख्वाहिश को,
बखूबी से पूरा करते थे पापा,
घर की ज़िम्मेदारियां का बोझ,
हर फर्ज को निभाते थे पापा,
आज आप बिछड़ कर चले गए,
आपकी याद बहुत आती है पापा,
आपकी कही बातें याद आती है पापा, जिंदगी भर पिता का साया,
नहीं होता उम्र के अंतिम पड़ाव में,
हर शख्स को दुनिया से चले जाना होता है, अपनी जिम्मेदारी उठाने का
फर्ज जो सिखाये थे पापा ,
आज उन वचनो को निभा रहे हैं पापा, संस्कार, अनुशासन
आपने ही तो सिखाया था पापा,
स्नेह दुलार आप ही तो करते थे पापा,
छोड़कर कहां चले गए पापा,
जिंदगी की हर समस्या को,
सुलझाते थे पापा हर पल,
सहारा थे पापा आपकी याद बहुत,
आती है पापा अंतिम विदाई
के बाद सपनों में आते हैं पापा,
हर पल साथ होने का एहसास जताते हैं पापा उम्र के इस पड़ाव पर,
आप की नसीहत याद आती है पापा,
आपकी कही बातें याद आती है पापा, आपकी याद आती है पापा,
शत शत नमन इस प्रथम पुण्यतिथि पर हम बहनों पर आशीर्वाद बना रहे पापा, हर शख्स को दुनिया से जाना पड़ता है पर बहुत याद आती है पापा
अंतिम विदाई के बाद जन्मो जन्मांतर तक मिलना ना होगा पापा,
पर आपका प्यार स्नेह दुलार,
हम बहनों को याद रहेगा पापा


नाम-सपना कुमारी
जिला-जहानाबाद बिहार

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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