साहित्य

मैं केशव मैं माधव


हे भारत तुम्हें जगाने आया हूं

है आज अष्टमी भादों की, कृष्ण जन्म की बेला

घर घर में फल फूलों का, लगा है सुहावन मेला

युगों युगों से हैं योगेश्वर के, सकल मनोरथ बोल

कर्म धर्म कर्तव्य है,जीवन का प्रज्ञा पथ अनमोल

मैं केशव मैं माधव ! हे भारत तुम्हें जगाने आया हूं

हे भारत तुम्हें जगाने आया हूं, युग रहस्य बताने आया हूं

विस्मय- द्वंद अब दूर करो, संपूर्ण अपना पुरुषार्थ करो

गाॅ॑डीव अभीष्ट तैयार करो, प्रत्यंचा पर शर संधान करो

मैं केशव मैं माधव! मैं गीता का सारांश सुनाने आया हूं

फिर से पाॅ॑चजन्य बजाने आया हूं, भारत तुम्हें विजयी बनाने आया हूं

हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं, युग रहस्य बताने आया हूं

अब इतिहास नहीं दुहराना है, सुभद्रा को युद्ध वृतांत पूर्ण सुनाना है

चक्रव्यूह का भेदन निर्बाध, अभिमन्यु के शौर्य पराक्रम से पूर्ण कराना है

बचना भीष्म, द्रोण से सिखाना है,निशा हो जाये जयद्रथ का शीश कटाना है

अब द्मूत क्रीड़ा नहीं रचाना है,दाॅ॑व पर द्रुपद सुता की मर्यादा नहीं लगाना है

लाक्षाग्रह अब स्वयं बनाना है, धृतराष्ट्र सुतों का अस्तित्व समूल मिटाना है

कौरव दल से भारत रक्षा कर,मुझे बार-बार के महाभारत का अंत कराना है

मैं केशव मैं माधव,हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं, युग रहस्य बताने आया हूं

कालरात्रि थी कारागार में जन्मा मैं, माता पिता थे कंस के बंदी गृह में

घनघोर घटाएं डरा रहीं थीं भादों में,सुबह हुई अपने को पाया गोकुल में

कुमुदित हुआ नंद यशोदा की पलकों में,शैशव बीता असुरों से संघर्षों में

स्वयं के संघर्षों की कथा सुनाने आया हूं, मैं केशव
मैं माधव,हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं

विपदाएं ,निराशायें आयें कितनी भी, दुश्मन जोर लगाये जितना भी

चाहिए उससे अधिक स्व आत्मबल भी,पर पीड़ा हरने का तप बल भी

स्व विलास,उन्माद, स्वार्थ की होती कोई विजय स्थाई नहीं

युद्ध अगर जन हित में हो, योद्धा हारे ऐसा कोई इतिहास नहीं

जहाॅ॑ वीर शिवा राणा से सेनापति हों, गुरु शिष्य, चाणक्य चंद्रगुप्त से हों

आजाद,भगत,अशफाक से बलिदानी हों, विक्रमादित्य, सुभाष, पटेल से नायक हों

उस पुण्य धरा को बार-बार नमन करूं मैं, मैं केशव मैं माधव, हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं

मैं फिर से जग को खेल खिलाने आया हूं, भीषण उन्मादों में रास रचाने आया हूं

पीड़ित जन मन को मुक्ति दिलाने आया हूं,हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं

हे भारत! है गौरवशाली इतिहास तुम्हारा, चीन पाक है हवा भरा गुब्बारा

एक को तूने ही बुद्ध दिये हैं, दूजा है औलाद तुम्हारी नाकारा

अक्षुण्य रहेगी कीर्ति तुम्हारी,है यह आशीष हमारा

मैं केशव मैं माधव,हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं

तुम शांति दूत विश्व गुरु वनोगे,आतंक अशांति से सदैव लड़ोगे

दुनियाॅ॑ में अमन अहिंसा का संदेश बनोगे,सारे जग को सम्मोहित कर लोगे

आने वाली सदियां तुम्हारी होंगीं, ऐसा हम वर देते हैं

इसीलिए हम इस पुण्य धरा पर बार बार जनम लेते हैं

मैं केशव मैं माधव, हे भारत! तुम्हें जगाने आया हूं
युग रहस्य बताने आया हूं …..

              जय श्री कृष्ण
                 जय भारत

     चंद्रप्रकाश गुप्त "चंद्र"
            (ओज कवि)
       अहमदाबाद, गुजरात
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