साहित्य

मैया आई मेरे द्वार

मैया आई मेरे द्वार
करूँ मैं तेरा सत्कार
घोड़े पर सवार मैया
आई है मेरे घर आँगन
लाल चुनरियां ओढ़े
कंगन भी मैया के बोले
रुनुकी झुनकी पायल मैया के
छमछम सी छम बोले
लाल बिंदिया मारे
टह टह शोभे लिलार
कानों में झुमका बोले
बोले नथ भरा नाकों का श्रृंगार
मैया आई मेरे द्वार
गले मे हार की माला मैया
ललाट पर बाल मैया के लटके
शोभे लट भरा ललाट
सजा हुवा मैया मेरी
मेरा घर आँगन
और तेरा दरबार
झालर बती धूप से
महके तेरा दरबार
दीपों से भरा दरबार
फूल राँहो में मैया के
मैं आज बिछाऊंगी
मैया तेरे आसन को
मैं चंदन से सजाऊँगी
विभन्न नैवेद्य बनाकर
हलवा के संग खीर पूड़ी
मैया तुमको खिलाऊँगी
चाँद की चाँदनी जैसा
तेरा रूप सजाऊँगी
दूध हल्दी की उबटन
मैया तुमको लगाउंगी
सारा अम्बर सारी धरती
पर फूल बरसाउंगी
शेर पर सवार होके मैया
आजा मेरे घर द्वार
नौ दिन नौ रूप तेरा
मैं दर्शन कर जाऊँगी
माँ रूप है अनोखा तेरा
तेरी महिमा बड़ी है प्यारी
तेरे हर रूप का गुणगान करे
ये धरती के जगत बिहारी
तेरी पूजा तेरी अर्चना
करे नौ दिनों तक दुनियाँ सारी
है जगजननी हे माता
तुम सबका करना कल्याण
तुम ममता की देवी माता
तुम सबको देना जीवन दान
तेरे आने की खुशी में झूमे जग सारा
झूम झूम के मैं भी नाचूँ
तेरे चरणों मे मैया
तेरे संग मैं सजकर नौ रूप
खुद का मैं भी सजा लूँ
तेरे प्यार में रम कर मैया
खुद को तेरा बना दूँ
तुम ममता की देवी मैया
करना सभी का कल्याण
तेरे चरणों में खुद को
मैं अर्पण करती आज
अपने जीवन की नैया
समर्पण करती आज
है जगत की जगजननी
मैया दो फूल अर्पण करती
तेरे प्यार में डुब्बी खुद को
जीवन समर्पण करती

कुमारी मंजू मानस
बिहार शिक्षक छपरा सारण
स्वरचित अप्रकाशित
मौलिक

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