साहित्य

मैया चंद्रघण्टा वाली

माता तेरी महिमा
होती है महान
तेरा हर रूप तेरी अद्दा
है बहुत निराली
नारी रूप में रहती…
तुम हर कण में विराजमान
माँ तेरा तीसरा रूप…
चंद्रघण्टा कहलाता
तेरे माथे पर अर्धचंद्र
है पाया जाता
इसलिये तुम मैया मेरी
चंद्रघण्टा कहलाती
कमल का आसान पर
तुम शोभित खुद को पाती
रहती तुम सदा ही विराजमान
सुनने में आता है
तेरे दस हाथ दास भुजाये
है पायी जाती
तेरा स्वरूप अनोखा
तुम अस्त्र शस्त्र से
शुशोभित कहलाती
ये रूप अनोखा कर
असुरों का करे विनाश
तेरी कृपा आलौकिक
गजब की ध्वनि सुनाई जाती
देखा नही सुना है मैंने
इन दिन माणिकपुर चक्र में
तुम जाती हो विराजमान
तेरी आराधना कर बालक
निर्भय बन जाता
शेर की तरह कँही भी
खुद का निडर रूप सजाता
घंटे की ध्वनि से
प्रेत बाधा दूर भगाता
माँ का रूप शौमय
शांति सा बन जाता
माँ की उपासना से
सम्पूर्ण मुख कान दिव्य रूप में
कान्ती से फैलाता
उपासक जँहा भी जाते
लोग उसे देख
शांति का अनुभव कर पाते
दिव्य प्रकाश फैला कर
परमाणुओ का विकिरण
हर रूप फैलाते
मन कर्म वचन से
शुद्ध होकर
आपकी उपासना करे हम
माँ के आशीर्वाद से
हर सूख हम पाते
इन रूप में माँ को
नारंगी रंग है भाता
कोशिश हमारी ये हो
माँ को नारंगी रंग से
सजाते
शोभित कर नारंगी रंग
अपनाये
इनकी पूजा अर्चना से
पदाधिकारी सब बन जाते
गौरव मान सम्मान हर जगह है पाते
इनकी शक्ति उपासना कर
माँ को खुश कर जाये
श्याम वर्ण हो
मुख पर तेज
उन महिला की पूजा
हम कर जाये
हलवा दही पूड़ी का
भोग लगाकर मैया को
चलो हम खिलाये
कलश घण्टा दान स्वरूप
मैया को भेंट चढ़ाये
माँ देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघण्टा रूपेण संस्थिवा
नमस्तस्यौ नमस्तस्यौ नमस्तस्यौ नमो नमः
इन मंत्रों की जाप से
मैया के तीसरे रूप को सजाये
इनकी पूजा अर्चना से हम सुख पाते
अपने जीवन को सफल
हर रूप सजाते
बोले हम मैया की
जय जगदम्बे कहते रहते
हर रूप के नारी में
माँ तुमको दर्शन करते
खुद का जीवन तुमको
अर्पण कर दूं
मैया तेरा रूप सलोना
खुद को मैं तुममें सपर्पित कर दूँ
जय माँ अम्बे जय जगदम्बे मैया

कुमारी मंजू मानस
बिहार शिक्षिका
छपरा सारण बिहार
मौलिक स्वरचित

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