साहित्य

मै लड़की हु कोई बोझ नही

राक्

मै लड़की हु कोई बोझ नही
मुझे उड़ान भरने दो।कुलदीपक
तो लड़का है । मुझे बाती बनकर
तो जलने दो।सपने मुझको भी
तो आते है।थोड़े तो पूरे करने दो।
इस समाज की बातो को छोड़ो
मुझे कदम बड़ा कर तो चलने दो
हर बार सहारा बेटा बन जाये।
बेटी को भी सहारा बनने दो।
बिन बाती के ना दीप जलेगा।
ना रोशन घर संसार बनेगा।
भाव ना मन के यु ही जलने
दो।मुझे भी अकेला चलने दो।

स्वरचित रचना राखी कौशिक
धामपुर बिजनौर

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