साहित्य

यही मतलब दिवाली है

यही मतलब दिवाली है
पटाखों को जलाने का ,
नहीं मतलब है दिवाली ।
घर आंगन रंगाने का,
नहीं मतलब है दिवाली। दीपक को जलाने का,
नहीं मतलब है दिवाली।
करो मन -आत्म का चिंतन, यही मतलब दीवानी है ।।
यही मतलब दीवानी है ।।
आए थे इसी दिन ही, श्री राघव परम प्रभुवर,
जली थी ज्योति भावों की, निशा बनकर दिखी दिनकर, समता और ममता की ,बही सुरसरि हर जग-रग,
ज्योतिर्मय हुए उर सब ,
तिमिर खुद भी भया जगमग, मिलाओ नेह की ज्योति ,
यही मतलब दिवाली है। भावों की ही लइया हो, मिठास हो खिलौनों सी।
अहं हो चूर चूरे सा,
खिले खुशहाली खीलों सी। गट्टे सा हो ठहराव,
करें शोधन निज मन का। दिवाली की दियाली हर,
करे बोधन निज मन का। जलाओ ज्ञान का दीपक ,
यही मतलब दीवाली है।।स्वच्छता तन की आवश्यक, जरूरी मन की भी तो है, अयोजन का प्रयोजन यह, जरूरी यह भी तो है ,
भरा छल और कपट मन में, मनाते हम दिवाली हैं।
अंधेरे में है डूबा मन ,
जलाते हम दिवाली हैं। कुटिलता हर,तज मन की, मनाएंगे दिवाली हम ।
सहजता भावों में भरकर सजाएंगे दिवाली हम ।
मनेगी फिर अमित मन में, दिवाली की दिवाली है…


अमित मिश्रा ‘एक भारतीय आत्मा’

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