कवितासाहित्य

यह जीवन धन्य है !

©राजीव कुमार झा


सबको सोचने का
बोलने का
अवसर मिला है!
जीवन फूल की
तरह
खिला है!
आदमी हर जगह
जिम्मेदारियों से
घिरा है!
संघर्ष ही संघर्ष
जीवन में
छिड़ा है!
अंधेरे में सबके पास
जलता दिया है!
सबने जीवन उधार
यहां धरती से
लिया है!
दुख की चादर को
खुशियों के
धागों से बुना है!
भगवान का नाम
जीवन के अंत में
जिसने सुना है!
यमराज के
दरबार में
अपनी आंखें
उसी ने ठीक से
मुंदा है!
हमारा नाम
संघर्ष के पथ पर
खुदा है!
मेरे साथ हर
आदमी
जीवन की जोत में
जुता है!

50% LikesVS
50% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!