कवितासाहित्य

यह सच है।

__संगीता श्री वास्तवा

चांद से ज्यादा भरोसा मुझे है दीपक पर ,
वो मेरी राह के अमावस दूर करता है।

बहुत खुश नसीब हैं पेड़ों के ये फल ,पत्ते,
दरख्तों ने इन्हें आसमां पे बिठा रखा है।

कोई काजल न कभी चेहरे को बदरंग करे,
अगर सियासत ये आंसू न इसके संग करे।

छलांग उंची ही सही घुटने भी छिल जाते हैं,
सीढियां लम्बी तो क्या ,मंजिल तक पहुचाती हैं।

मन का आईना हमें हमेशा सही राह दिखाता है,
ये लालसा,लोभ ही ,हमें राह से भटकाता है।

ये खिड़कियां बस धूप और हवा हीं नहीं देती हैं,
आंधियों मे हमें आवारा पत्तों से भी बचाती हैं।
है परिन्दों को पता वो हमेशा हैं निशाने पर,
फिर भी बेखौफ वो उड़ान भरा करते हैं।

ख्वाब कब हुए हैं ,पसीने व पांव के छाले से अलग,
इन्हीं की राह चलके कामयाबी मिलती है।

   संगीता श्री वास्तवा

वाराणसी यू.पी.

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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