साहित्य

योग करें ,रोज करे,निरोग रहें


   आज समय ऐसा  आ गया है, कि   बच्चा पैदा हुआ  बचपन से जवानी तक पहुंचते पहुंचते समस्याओं के चलते काफी हद तक मुरझाने सा लगता है काफी हद तक  जिसका मुख्य कारण विञापनो द्वारा फैलाया जा रहा भ्रमजाल भी हो सकता है । पर मनुष्य की सेहत खराब करने का दो मुख्य कारण पहला इंसान के जीवन में सुस्ती व आलस व दूसरा सिगरेट,गुटका,सुरती, तम्बाकू व  पान मसाला । इन कारणों से मनुष्य की सेहत तो खराब होती है साथ ही जेब भी खाली।
      वैसे आज के युवा सेहत के प्रति  जागरूक तो हुए हैं, पर वे जिम की ओर ज्यादा आर्कर्षित हो रहे हैं। जिम मे जाकर शरीर तो बनाया जा सकता है पर धन का अपव्यय भी होता है और यह भी जरूरी नही कि जिम में की जाने वाली एक्सरसाइज सबको सूट करे। वैसे शरीर अंदरूनी व बाहरी सुंदरता और शारीरिक लचीलेपन  के लिए् योग साधना ही सबसे उत्तम साधन है, यदि इसे जीवन में एक बार उतार लिया तो वाह वाह और खर्चा भी नही के बराबर । आवश्यकता है साधरण पोषाक और मात्र एक चटाई की। योग के लिए सबसे बढ़िया समय प्रातःकाल का होता शौचक्रिया के उपरांत जब पेट खाली हो। और यदि प्रातः समय न हो तो शाम को मगर दोपहर के भोजन के  तीन से चार घंटे उपरांत जब दोपहर का भोजन पच गया हो अर्थात पेट खाली हो।
      शुरुआत मे सबसे पहले प्रातः काल दोनो हाथो से धरती का स्पर्श करना चाहिए क्योंकि धरती मां है और फिर सूर्यदेव को ऊर्जा हेतु नमस्कार उपरांत और आसन या चटाई पर बैठ कर दस सूक्ष्म व्यायाम के उपरांत आलथी पालथी मार साधारण मुद्रा में बैठ कर साधारण प्राणायाम कर लिया जाय तो इतना ही बहुत है अच्छी सेहत के लिए। इसी लिए कहा गया है योग करें,रोज करें, निरोग रहे । और जब आदमी एक बार अपने जीवन में यौगिक क्रियाओं को अपना ले तो नियम भी जीवन में अपने आप आ जाते हैं और रोग भी काफी हद तक दूर रहते ।

स्वलिखित व अप्रकाशित
संजय प्रधान, देहरादून।

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!