साहित्य

रंग बदलते लोग –

उपासना कौशिक

लोगो ने देखा है गिरगिट को रंग बदलते हुए मैने तो इंसानो को ही रंग बदलते देखा है।

लोगो ने देखा है कलियों से फूलो का खिलना और मैने फूलो को पेड़ो से टूटते देखा है ।

छाया देते है वृक्ष जो सबने देखा है उन्हे हिलते हिलते और मैने उन वृक्षों को जड़ से उखड़ते देखा है।

लोगो ने देखा है अक्सर चांद तारों को जाकर और मैने सुंदर चांद को भी ग्रहण में पड़ते देखा है।

लोगो ने देखा है अक्सर मोरो की सुंदरता को और मैने मोर को पैरो के लिए रोते हुए देखा है।

देखा है लोगो ने हरियाली हरियाली को और मै वो हु जिसने बंजर जमीन को देखा है।

लोगो ने देखा है अक्सर बारिश की सुंदर बूंदो को और मै वो हु जिसने काले बादलो में अपने आँसू को देखा है।


✍️उपासना कौशिक

धामपुर बिजनौर

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