साहित्य

रचता है वो बसता है

किसी ने सच ही कहा है जो रचता है वो बसता है मेरी प्यारी बेटी सर्वप्रिय प्रियंका गुप्ता आज कमसिनी में भी लेखन के नये आयाम के साथ आगे बढ़ रही है। बावरा मन उसकी मौलिक कृति है जो शायद उसके जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों से प्रेरित सुंदर और सहज रचना संग्रह है। एक बेटी अपनी मुंह बोली मां की रचनात्मक विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। ये लेखन के प्रति उसका समर्पण ही है कि मात्र बीस बरस की उम्र में उसने नायाब लेखन और रचनाधर्मिता का अभूतपूर्व कार्य किया है। जिस तरह प्रियंका गुप्ता सहज, सरल और सौम्य होने के साथ जीवन के प्रति ईमानदार है, उसी तरह उसकी रचनाओं में भी यथार्थता और सहजता के दर्शन होते हैं । मैं उसके लिए बस इतना ही कहूंगी…
कभी चांद, कभी सूरज, कभी गुलों सी, कभी खुशबू सी लगे मुझे
वो इस जहान की परी तो कभी कहक़शां है आसमान की ।
मैं सदैव सदैव उसके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूँ ।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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