साहित्य

रामनवमी

ज्ञानेन्द्र पाण्डेय “अवधी-मधुरस”

पाप बढ़ता जभी, राम आते तभी
दीन-दुखियों के, कष्टों को हरते सभी
भाव के भूखे बस, सच में जान लो
सहज दौड़े आते, न देर लाते कभी

कर्तव्य कैसे करें? राम खड़े सामने
पुत्र कैसा बने? राम खड़े सामने
धर्म का, नीति का, प्रेम का, बचन का
पालन कैसे करें? राम खड़े सामने

राम मिलते वहाँ, शबरी बसती जहाँ
राम मिलते अहिल्या, दुःखी हो जहाँ
या जहाँ, भाई-भाई का शोषण करे
राम मिलते वहाँ, मैत्री दिखती जहाँ

एक प्रतिमान हैं, राम प्रतिमा नहीं
राम वरदान हैं, कोई लघिमा नहीं
काम के, दाम के, अमन के, चैन के
राम भगवान हैं, उनमें अहमां नहीं

दीप सम हैं जले, समय संग भी ढ़ले
साधने लोक को, ताप में भी जले
लांछना भी मिली, सत्य संधान में
अपने ही राज में, गये राम हैं छले

लोकहित ही के लिये, “स्व” अर्पण किया
भावनायें जगीं, उनका तर्पण किया
मुकुट त्यागा जभी, लोकरंजन हुये
सब प्रजा के लिए ही, समर्पण किया

(पवित्र रामनवमी याद दिलाती है कि त्याग, तपस्या और सच्चरित्र मनुष्य को चिरजीवी बना देता है, अमर कर देता है।)
जय-जय श्री सीताराम !

  ज्ञानेन्द्र पाण्डेय "अवधी-मधुरस" अमेठी
  8707689016
100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!