साहित्य

रामायण की बहुचर्चित पात्र “अहिल्या” के पत्थर बनने के आयाम

डॉ अ कीर्तिवर्धन

संवेदनाएं जब मर जाती हैं, जीवन पहाड़ सा बन जाता है,
हर पल- पल-पल जीवन का, शिला सा भारी हो जाता है।

अहल्या क्यों शिला बनी थी, आज समझ में आता है,
परित्याग जब किया पति ने, पत्थर बनना ही भाता है।

संवेदना के दो बोल भी, ऋषि डर से जब नहीं मिले,
एकांत का हर एक पल उसका, पर्वत सा बन जाता है।

परित्यक्ता अहल्या से जब, राम ने आ संवाद किया,
संवेदना की अपनी बातों से, उलझन को भी दूर किया।

पिंघल गयी पाषाण प्रतिमा, आँसू से सारा पाप धुला,
सम्वेदना के दो बोल से, अहल्या का उद्धार हुआ।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
विद्यालक्ष्मी निकेतन
53- महालक्ष्मी एन्क्लेव
मुज़फ्फरनगर-251001 उत्तर प्रदेश
08265821800

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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